शारदे माँ! सुन मेरी विनती, मेरे मनुहार को

माँ शारदे! वर दे

शारदे माँ! सुन मेरी विनती, मेरे मनुहार को, छेड़कर वीणा तू कर, झंकृत हृदय-संसार को।

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ग़मों का दौर भी जरूरी है

​ऐ जिंदगी, तेरा सबक, क्या लाजवाब है, ज़मीर की खातिर, गमों का दौर भी जरूरी है। इस भाग-दौड़ से क्या हाँसिल हुआ अब तक, इसका हिसाब करने को, इक ठौर भी जरूरी है।

मातृभाषा हिंदी के सम्मान में दो शब्द – Literacy Not Limited To English

​हमारे देश की सबसे बड़ी विडंबना कॉर्पोरेट कार्यालयों में देखने को मिलती है जहाँ ज्ञान का मापक यंत्र अंग्रेजी भाषा है। अगर साक्षात्कार में साक्षात माता सरस्वती भी विराजमान हों तो धाराप्रवाह अंग्रेजी बोले बिना चयनित नहीं हो सकतीं...

वो सुबह कभी तो आयेगी… A Salute To Sahir Ludhianvi Sahab

माना मैं चलने वाला हूँ, संग तेरे दौड़ नहीं सकता, अपने जज़्बाती गीतों को सिक्कों से तौल नहीं सकता, मैं न भी रहा, ये गीत फिजाओं में घुलकर रह जाएंगे, ये तान तुम्हारे कानों से जिस दिन भी टकरा जाएंगे, मुझको ठुकराया था तूने, 'उस' गलती पर पछताएगी, वो सुबह कभी तो आयेगी वो सुबह कभी तो आयेगी...

इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा – I’m Innocent

मुस्कान तुम्हारी कातिल है, नागिन जुल्फें लहरातीं हैं, बस एक झलक ही काफी है, सम्मोहित सी कर जाती है। यदि मैं आपा खो बैठूं फिर अंजाम तुम्हारे सर होगा, मुझको दीवाना करने का इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा।