‘शायरी का फ़न-Poets Think Differently’

Poets think differently
Poets think differently

1-
मेरे ‘ गमों ‘ की फेहरिस्त में कुछ और इजाफा कर दे,
इक दिल ही बचा है इसे भी लूट ले….

2-
बदनाम आदमी हूँ मशहूर शहर का,
दिल की बात जुबां से अक्सर निकल जाती है…

3-
अंदाज देखकर मै हैरान रह गया,
अंजाम की फिकर है, मै बर्बाद हो न जाऊं….

4-
तेरे इश्क ने किया है आबाद मेरी दुनिया,
नहीं तो जुबां मेरी इक शेर भी कहने को तरसती…

5-
न कम कर आंक मेरी कलम है सैलाब दरिया का..
और तुफानो में भी हवा तो हम ही भरते हैं.

6-
सब देखकर दहल गए अंजाम इश्क का.
हम डूबकर भी अनजान है यारों इस मर्ज से..

7-
न कर बर्बाद वक्त अपना, टुकड़े बटोरने में,
खेलने के वास्ते कोई और दिल तलाश कर..

8-
हुस्न की गलियों में ढूँढा इश्क पर नहीं मिला,
अपनी गजलों को ही अपना महबूब बना रखा है…

9-
आंधियां जब तलक मेरे पास आएँगी..
तुम बहुत दूर मुझसे निकल जाओगे..
दीप जलता रहेगा मगर प्यार का,
लौटकर फिर से वापस अगर आओगे.

10-
हमने किया समर्पित फल, फूल छाँव, लकड़ी,
ऐ आंधियों बता दो, फिर भी ये बैर कैसा…

11-
यूँ ही मेरे कुछ जख्म जो ,
कागज़ पे ढल गए तो,
दुनिया वालों की नजर में
हम शायर हो गए हैं.
बस करना चाहा हल्का,
कुछ बोझ अपने दिल का,
सब लोग मेरे फ़न के
अब कायल हो गए हैं…

12-
तकदीर पर भरोसा मत कर दुकान वाले,
ग्राहक जुटाने के लिए कुछ इंतजाम भी जरुरी है.
पोस्टर बना, स्कीम दे, advertisement कर,
सिर्फ बढ़िया माल नही ये
ताम झाम भी जरुरी है…

13-
जाने कब हो जाऊं , दुनिया से तेरी रुखसत,
मेरी गजलें तुझे नज़र हैं , मेरा अक्स इसमें शामिल…

14-
तुम जिसे कहते हो,
मेरा बडबोलापन,
कुछ लोग इस हुनर को
शायरी का फ़न कहते हैं…
जो चाहे नाम दो इसे ,
हुनर कहो या लत,
ये मुझे कल भी अजीज था,
आज भी हम यही कहते हैं…

15-
जो कभी ना हुआ..
बाहुबली वो काम कर गया..
कोई एशियन पेंट हो गया..
और कोई wheel की खुशबू सूंघता रह गया…..

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2 thoughts on “‘शायरी का फ़न-Poets Think Differently’

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