India’s ‘Surgical Strike’-Some facts of a major Indo-Pak event.

India's 'Surgical Strike'-Some facts of a major Indo-Pak event

आज विश्वमंच पर हिंदुस्तान को एक धर्म निरपेक्ष, उदारवादी और शांति चाहने वाले देश के रूप में देखा जाता है और इस देश ने इस दिशा में अनेक सार्थक प्रयास करके अपनी इस छवि को बरकरार रखा है। लेकिन मुल्क में अमन कायम रखने के लिए ज़रूरी कदम क्या होने चाहिए? आतंकवाद के खिलाफ बर्दाश्त की हद क्या है? भारत का ‘Surgical Strike’ इन दोनों सवालों का सही और सटीक जवाब है।

वैसे तो दुनियां के लिए ‘Surgical Strike‘ शब्द कोई नया नही है और पहले भी इस तरह के आपरेसन को अंजाम दिया जाता रहा है लेकिन हिंदुस्तानी नजरिये से इसे अब तक का सबसे कामयाब आपरेसन माना जा रहा है क्योंकि इसमें हिंदुस्तानी कमांडोज ने पाकिस्तान में घुसकर न सिर्फ दहशतगर्दों के 6 कैम्प तबाह किए और 50 से अधिक का खात्मा किया बल्कि बिना किसी नुकसान के वापस भी आ गए। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है। साथ ही ऐसा करके हिंदुस्तान ने दुनिया के सामने अपनी विदेशनीति भी स्पष्ट कर दी है की भारत के निशाने पर सिर्फ पाकिस्तानी दहशतगर्द हैं न कि पाकिस्तानी अवाम और उनकी नापाक जमीन। अब यह पाकिस्तानी हुकूमत पर निर्भर करता है की वह क्या चाहती है, दहशतगर्दी या कुछ और हिंदुस्तानी ‘Surgical Strike’। यहाँ युद्ध की संभावनाएं अधिक दिख रही हैं और अगर ऐसा हुआ तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पाकिस्तान होगा, ऐसा हम नहीं पाकिस्तान के आलावा बाकी दुनिया कह रही है।

यही कारण है कि आज पाकिस्तान विश्व मंच पर अकेला पड़ गया है और अपनी हताशा छिपाने के लिए वहां के हुक्मरान इस स्ट्राइक को झुठलाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। वहीँ आतंकी सरगना हाफिज सईद अपने आकाओं की सह पर स्ट्राइक को एक हिदुस्तानी ड्रामा बता रहा है, साथ ही पलटवार करने की धमकी भी दे रहा है। आज पाकिस्तानी हुकूमत के सामने दोहरी मुसीबत है। अगर वह इस ‘Surgical Strike’ को मानती है तो सीमा पर आतंकवादी कैम्प होने की बात सामने आ जायेगी जिसे खुलकर पाकिस्तान नहीं बोल सकता। और इसे गलत बताते हुए झुठलाने का प्रयास करती है तो पाक सेना अपनी सुरक्षा का हवाला देकर शासन की बागडोर अपने हाथ में लेकर इतिहास दोहराने का प्रयास कर सकती है। मतलब नवाज के लिए एक तरफ कुआँ तो दूसरी तरफ खाई है। इन परिस्थिरियों को देखते हुए नवाज को कारगिल युद्ध के बाद की अपनी नजरबंदी भी याद आ रही होगी। ऐसे में शरीफ को अपनी शराफत दिखाने का मौका मिलता नहीं दिख रहा। यही वजह है कि शिवाय कुछ धमकियों के पाकिस्तान अभी तक कुछ सोच नहीं पाया है। कोई ‘Nuclear War‘ की धमकी दे रहा है तो कोई ‘Surgical Strike’ सिखाने की। ऐसे में भारतीय सरकार क्या कदम उठाती है, आज पूरी दुनियां की नजर इस बात पर है।

वर्तमान परिस्थिति और संभावना पर बात करने से पहले हम 17 साल पहले के इतिहास पर थोडा गौर कर लेते हैं। जब मई 1999 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फोन पर नवाज से कारगिल विषय पर बात की तो वे पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों से अनजान बनते हुए खुद को शरीफ साबित करने की कोशिस करने लगे। फिर कुछ दिनों बाद इसे ‘मुजाहिद्दीन की जंग’ करार देकर खुद को बचाने का प्रयास किया। मगर अंत में न सिर्फ जनरल परवेज मुसर्रफ बल्कि पाकिस्तानी मीडिया और बाकी नेताओं ने कारगिल युद्ध में पाक सेना के शरीक होने की बात कबूल की। उस समय भी ‘Nuclear War‘ की धमकी दी गई थी जब पाकिस्तान के विदेश सचिव शमशेद अहमद ने 31 मई 1999 को एक बयान जारी करते हुए कहा था कि अगर कारगिल युद्ध और आगे गया तो ‘किसी भी हथियार’ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बात को और बल तब मिला जब एक पाकिस्तानी सीनेट सदस्य ने अपने बयान में कहा की पाकिस्तान के परमाणु हथियार बेकार हैं अगर उसे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल नही किया जाए। हद तो तब हो गई जब एक अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने दावा किया की पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार हिंदुस्तानी बॉर्डर पर भेज रहा है। तब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने नवाज को तलब करके फ़ौरन पाक सैनिकों को वापस पाकिस्तानी सीमा में लौटने को कहा। इस प्रकार वैश्विक दबाव में आकर शरीफ ने शराफत दिखाई और अपने सैनिकों को वापस आने का आदेश दे दिया लेकिन इस फैसले का खामियाजा ये हुआ की उन्हें पाक सेना की नाराजगी झेलनी पड़ी। उन्हें न सिर्फ अपने ओहदे से हाथ धोना पड़ा बल्कि अपने ही घर में नजरबन्द कर दिए गए। जनरल परवेज मुसर्रफ ने मौके का फाएदा उठाया और सेनाध्यक्ष से राष्ट्राध्यक्ष बन गए और पाकिस्तान से जमहूरियत का सफाया कर दिया। बागी अफसरों का कोर्ट मार्शल कर दिया गया और नवाज को अपनी जान बचाने के लिए सऊदी अरब की शरण लेनी पड़ी।

आज जनाब नवाज शरीफ की हालत और भी बदतर है। क्योंकि एक तरफ तो सेनाध्यक्ष हैं जो अपने बयानों में नवाज को अपनी नौकरी से सरोकार रखने की नसीहत दे रहे हैं। वहीँ दूसरी तरफ आतंकी सगठन जो नवाज को चैन की साँस नहीं लेने दे रहे। ऐसे में नवाज से किसी भी तरह की उम्मीद रखने का औचित्य नहीं है।

आज पूरी दुनिया मानती है कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और भारत इस समस्या से कई दसकों से जूझ रहा है। इस बात के पुख्ता सबूत हैं की पाकिस्तान आतंकियों को न सिर्फ अपनी जमीन देता है बल्कि आर्थिक सहयोग देने के साथ साथ हथियार भी मुहैया कराता है। साथ ही साथ समीपवर्ती हिन्दुस्तानियों को डर दिखाकर तो कभी बरगलाकर बगावत के लिए मजबूर करता है। हाल के दिनों में जम्मू महीनों कर्फ्यू की चपेट में रहा है फिर उड़ी हमले में 18 जवानों की शहादत। ऐसे में भारत के पास विकल्प सिमित हैं और अमेरिकी तर्ज़ पर ‘ सर्जिकल स्ट्राइक’ एक महत्वपूर्ण कदम जिसे पूरे देश का समर्थन प्राप्त है।

ऐसे में ऐसी न्यूक्लियर वार जैसी ओछी धमकियों से भारत को डराने की कोशिश तो होगी ही। क्योंकि पाकिस्तान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन भारत में अमन है और इसकी रक्षा के लिए हर भारतीय तत्पर। भारत युद्ध विराम चाहता है लेकिन आतंकवाद की शर्त पर नहीं। अगर आज भारत इन धमकियों से विचलित हो गया तो आने वाले समय में यह बात इन दहशतगर्दों के लिए प्रेरणा स्रोत बन जायेगी। आज ये जिम्मेदारी सम्पूर्ण विश्व पर है की वह रासायनिक और जैविक हथियारों को गलत हाथों में पहुंचने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। नहीं तो मानवता के महाविनाश के लिए सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व कसूरवार होगा।

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