प्यार की दास्तान-शेर-ओ-शायरी

प्यार की दास्तान, क्या कहना
हँस रहा है जहान, क्या कहना

कहीं बेआबरू न हो जाए,
बड़ा है खानदान, क्या कहना

छोड़िये गैर को, अपने मेरी खिलाफत में
दे रहे हैं बयान, क्या कहना

जहर बुझे से लगते हैं तीर लब्जों के
उनकी तीखी जुबान, क्या कहना

चल रहे तीर हर तरफ से मेरे सीने पर,
मेरी टूटी कमान, क्या कहना

जान जाती है इधर और जश्न उनके घर,
उनके हाथों में जाम, क्या कहना

देखकर हस्र इश्क का शायद
हुश्न है बेजुबान, क्या कहना

बड़े जतन से अबतक सजा के रक्खा था
लुट गयी है दुकान, क्या कहना

कैसे महफ़ूज रखोगे अबकी बारिश में
गिर रहा है मकान, क्या कहना

”अब भी तुम रेंगते हो धरती पर”,
कह रहा आसमान, क्या कहना

सबक-ए-जिंदगी है याद किसे,
आज है इम्तिहान, क्या कहना

चाहें जो हो, मेरे दिल में वफ़ा तो जिंदा है,
मुझको है इत्मिनान, क्या कहना

2 thoughts on “प्यार की दास्तान-शेर-ओ-शायरी

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