तुम्हे भूलकर गुनगुनाना पड़ेगा-ग़जल

मुझे अपने दिल को मनाना पड़ेगा
तुम्हे भूलकर गुनगुनाना पड़ेगा

मुझे रास आने लगा है अंधेरा,
जमाने से मुझको छुपाना पड़ेगा

कहीं लोग समझे न मैं गुमशुदा हूँ
दिया अपने घर मे जलाना पड़ेगा

कहीं मेरे अरमां बगावत न कर दें
इन्हें दिल में जबरन दबाना पड़ेगा

जमाने के हाथों कहीं लग न जाए
तुम्हारे खतों को हटाना पड़ेगा

बुरे वक्त में कौन मुझे साथ देगा
यही वक्त है, आजमाना पड़ेगा

कमी क्या थी मुझमें, न मुझसे जताया
ख़ुदा से तुम्हे सब बताना पड़ेगा

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