आज की रात दीवाली है, न सोई होगी

आज की रात दीवाली है, न सोई होगी
मेरी माँ आज बड़ी देर तक रोई होगी

‘वो भी क्या दिन थे, पटाखे थे, फुलझड़ियां थीं’
मेरा ख़त हाथ मे होगा , कहीं खोई होगी।

आज त्योहार है, क्या-क्या नहीं बना होगा
पर मेरे बिन बड़ी फीकी सी रसोई होगी

जिद पे पोते के लोरियाँ सुना रही होगी
मेरा बचपन कहानियों में पिरोई होगी

‘जाने किस दिन को आ जाए जिगर का टुकड़ा’
वो मिठाई और बतासे संजोई होगी

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