मुझपर अधिकार तुम्हारा – एक प्रेमगीत

तुमने मेरी ओर निहारा, हिय को हर्षित कर डारा
अब प्रेम-प्रदर्शन हो रहा है, तेरे नयनों के द्वारा
तेरे नयनों के द्वारा

तुम्हें याद है मंदिर में जब, हम पहली बार मिले थे
तुमनें पलकें थीं झुकाई, अधरों पर फूल खिले थे
बस एक झलक ने छेड़ दिया, मेरे दिल का इकतारा
मेरे दिल का इकतारा

मेरे सपनों में आती, फिर आकर यूँ इठलाती
मुझको डसने को आतुर, नागिन जुल्फें बलखाती
तेरे दर्शन की इच्छा में है बीता साल हमारा
है बीता साल हमारा

कोई कहे जाप कराओ, कोई कहे वैद्य बुलाओ
कोई कहे कसरत करके, तुम सूखे मेवे खाओ
यह प्रेम का रोग भयंकर है, कोई क्या जाने हाल हमारा
कोई क्या जाने हाल हमारा

मैंने कितना तुम्हे हेरा, पर भाग्य बली था मेरा,
तुम दुल्हन बन घर आयी, तेरे साथ हुआ मेरा फेरा
तेरी छवि से घर में फैला, उजियारा ही उजियारा
उजियारा ही उजियारा

कानों में अमृत घोलो, इन अधरों के पट खोलो,
कबतक यूँ मौन रहोगी, प्रिय! कुछ तो मुझसे बोलो
अब क्या संसय, मैं तेरा हुआ, मुझपर अधिकार तुम्हारा
मुझपर अधिकार तुम्हारा

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