काँटे का स्वाभिमान – गीत – Thorn’s Attitude

अतिलघु रूप हमारा फिर भी
मुझपर मत स्वामित्व जमाओ।
छोटा सा कांटा हूँ तो क्या
मत मुझको तुम पैर लगाओ।।

तुम मेरा अपमान करोगे
मैं तेरा गुणगान करूँगा
कैसे सोच लिया यह तुमने
मैं तेरा सम्मान करूँगा

मेरा भी अस्तित्व धरा पर
रहने दो मत मुझे मिटाओ।
छोटा सा कांटा हूँ तो क्या
मत मुझको तुम पैर लगाओ।।

स्वाभिमान के साथ जिया हूँ
स्वाभिमान के साथ जिऊँगा
तुम प्रयत्न कर थक जाओगे
तेरे मारे नहीं मरूँगा

मैं प्रतिकार करुँगा तेरा
हाथ लगाकर तो दिखलाओ।
छोटा सा कांटा हूँ तो क्या
मत मुझको तुम पैर लगाओ।।

पुष्प तुम्हे प्यारे हैं फिर भी
क्या व्यवहार किया है तुमने
जिसने तुमको महक दिया है
जीवित मार दिया है तुमने

इत्र बनाया उन्हें मसलकर
झूठ कहूँ तो मुझे बताओ
छोटा सा कांटा हूँ तो क्या
मत मुझको तुम पैर लगाओ।।

फूलों को समझा कर हारा
रंग रूप पर मत इतराना
सब तुमसे मतलब साधेंगे
पड़े न तुमको अश्रु बहाना

स्वाभिमान के हेतु धरा पर
कुछ कठोरता भी अपनाओ
छोटा सा कांटा हूँ तो क्या
मत मुझको तुम पैर लगाओ।।

Motivational poem on flower