हिंदुस्तानियों की चाहत है

​ज़हर जुबान पर, हाथों में उनके पत्थर है, वतनपरस्तों से ये मुल्क बहुत आहत है, जिनके खून में हिंदुस्तान कुछ नहीं बाकी, उन्हें दुत्कार दें, हिंदुस्तानियों की चाहत है...

हम दीपक बनकर चमकेंगे – Do what you can

भारत के दर्शन में कवित्त, कविता दर्शन की मूर्त रूप, उपनिषदों, वेद-पुराणों के श्लोकों का है पावन स्वरूप। जो ज्ञानयोग व् कर्मयोग, 'गीता' हमको सिखलाती है, वह वेद व्यास की गाथा है, जिसको दुनिया अपनाती है।

​दिलों में झाँकता, जमीर टटोलता कोई – See the heart’s beauty, not only face

दिलों में झाँकता, जमीर टटोलता कोई, 'बड़ा ही खूबसूरत है' ये बोलता कोई। जिसे भी देखिए चेहरे पे फ़िदा हो जाता, हुस्न की भीतरी परतें भी खोलता कोई।

छंदबद्ध कविता लिखने के आसान नुस्खे- Learn to compose rhymed poetry in five simple steps

काव्य सृजन कवि की गरिमा है, और इस सृजन से कवि पूर्णता का अनुभव करता है। लेकिन कभी-कभी उचित भाव पैदा नहीं होते और कवि हृदय कुंठित होकर बेफजूल और अपने स्तर से काफी नीचे की कविताओं को गढ़ना शुरू कर देेता है। ऐसी परिस्थिति में लयबद्धता कभी- कभी रामबाण सिद्ध होती है क्योंकि एक लय बन जाने के बाद भावसृजन की तीव्रता बढ़ जाती है, यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जिसे मैं आपके साथ बाँटना चाहता हूँ। आगे बढ़ने से पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह लेख नवोदित कवियों को ध्यान में रखकर उनतक अपना व्यक्तिगत अनुभव पहुचाने के उद्देश्य से लिखा गया है। कविता का सृजन दो तरह से होता है- 1- भाव सृजन के बाद सुन्दर शब्द, रस, छंद और अलंकार जैसी काव्यात्मक कलाओं के माध्यम से भाव पक्ष को मजबूत करना। 2- सुन्दर लय पैदा करके उसपर भावसृजन करते जाना। इसमें प्रथम प्रकार को हम प्राकृतिक कह सकते हैं, जो किसी परिस्थिति विशेष में कवि हृदय से सृजित होता है, और छंद स्वयं भावों का अनुशरण करने लगते हैं। काव्यसृजन का दूसरा प्रकार कुछ अलग है और हमारे अन्वेषण का केंद्र भी यही है। यदि आप कवि हैं तो भाव सृजन प्राकृतिक रूप से होना चाहिए और अगर नहीं होता है तो निम्नलिखित तरीके से एक बार प्रयास करके देखिए। छंदबद्ध कविता लिखने के पाँच चरण-

बाज़ार में अश्कों की कीमत तो देखिए – कलाम-ए-शायर

​है मुफ़लिसी का दौर पर हिम्मत तो देखिए, इस शायर-ए-फनकार की मोहब्बत तो देखिए। बिन पंख के ही उड़ने को बेताब किस कदर, नादान परिंदे की हसरत तो देखिए।

‘तुझे कैसे घर से विदा करूँ?’ एक विदाई गीत

छुटकी तेरी बदमाशियाँ मुझको बहुत याद आएंगी, यादें जो दिल में कैद हैं, मुझको बहुत तड़पायेंगी, इन्हें आ मैं दिल में ही घोंट दूँ, बापू का फ़र्ज़ अदा करूँ, तू जो इतने दिल के करीब है, तुझे कैसे घर से विदा करूँ?