घर चलो दिन ढल गया – Let’s go home

कभी सुबह आके जगा गई, कभी धूप में तन जल गया, कभी शाम ने कहा कान में, चलो घर चलो, दिन ढल गया

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दिलों की खाईयाँ पटने लगी हैं – We may united

दिलों की खाईयाँ पटने लगी हैं बहुत थी दूरियाँ, घटने लगी हैं कही तुमने दो बातें साफ दिल से हमारी उलझने मिटने लगी हैं

यही फ़लसफ़ा है, यही जिंदगानी – एक गीत – You need someone

कोई भी न जानें मुकद्दर में क्या है यहाँ आदमी इक खिलौना बना है नहीं मंजिलों की खबर है किसी को, ये राहें दिखाती हैं आँखे सभी को मगर फिर भी इंसान रुकता कहाँ है भले कल की बातें न उसको पता है कहीं भागते ही न बीते जवानी यही फ़लसफ़ा है, यही जिंदगानी