खंडहर, भुतहा मकानों में परिंदे छुप गए – ग़ज़ल

खुद तुम्हारे पाँव कीचड़ में सने हैं दरअसल, दूसरों को कायदे-कानून समझाने गए?? एक मुट्ठी फायदे खातिर वहां कश्मीर में, मुल्क में तुम नफरतों की आग भड़कानें गए??

कभी आंधी, कभी बवंडर दिखाई देता है – A New Classification Of Poetry

We may classify the poetry as  1- Serious poetry 2- Semi serious poetry 3- Light poetry With above reference the first one is the outcome of the deep insight of the poet in any subject, incident or any thing else, on the other hand second type starts in light way, may be the imitation of an art. But some times it effects more strongly than serious one, specially when the expressed emotion be naturalized.

तूफ़ान की जानिब – The Journey against Storm

बड़े लोगों की ऊँचाई जो दिखती है, नहीं होती, दिखावे में चले आए हैं जीते, सच छुपाने को। हमीं हैं अन्न के दाता मगर फिर भी हमीं भूखे, किसानों ने कहा मायूस हो, अपने फ़साने को।

‘परछाईं लिए बैठा हूँ – Following Shadows’ 

Following Shadows

अपने दिल की रुसवाई लिए बैठा हूँ मै समंदर की गहराई लिए बैठा हूँ। मातम मना रहे हैं सब उनके जाने का मै अपने घर में देखो शहनाई लिए बैठा हूँ। उनका सलाम करना, उफ़ वह लूटने का फन मै आज तक उस शख्स की परछाईं लिए बैठा हूँ। जज्बात की आंधी में उड़ने का … Continue reading ‘परछाईं लिए बैठा हूँ – Following Shadows’ 

‘मै नहीं बदला – I Never Changed ‘ 

Never Changed

दिल में इक शोर था पर नहीं दहला, वक्त बदला, मै नहीं बदला. बिजली की रौशनी से चकाचौध हर शहर, मैंने घर का दिया नहीं बदला . बरसों लगा रहा मै, मंजिल तलाशता, सबकुछ किया पर रास्ता नहीं बदला . Composed By Kaushal Shukla