मुझको अद्भुत ज्ञान मिला है – गीत

थी कमान पर लक्ष्यहीन थी दुविधा से आँखे मलीन थीं तरकस में बेकार पड़े इन तीरों को संधान मिला है। मुझको अद्भुत ज्ञान मिला है।।

रेत पर पदचिन्ह तेरे – गीत

जिंदगी के रास्तों पर सैकडों दुश्वारियां हैं मुश्किलों से जूझने की क्या तेरी तैयारियाँ हैं पथ जरा समतल मिला तुम भूल बैठे कंटकों को लक्ष्य को पाने से पहले लाख जिम्मेदारियां हैं धैर्य खोकर चाहते हो भाग्य का चमके सितारा। रेत पर पदचिह्न तेरे और सागर का किनारा।।