बिन मेरे श्रृंगार कैसा – Break-up

कल तुम्हारा वन हरा था झूमतीं आयीं बहारें आ गया सावन सुहाना साथ ले रिमझिम फुहारें आज जब पतझड़ मिला है सत्य से प्रतिकार कैसा? माँग का सिंदूर हूँ मैं बिन मेरे श्रृंगार कैसा?

मुझको अद्भुत ज्ञान मिला है – गीत

थी कमान पर लक्ष्यहीन थी दुविधा से आँखे मलीन थीं तरकस में बेकार पड़े इन तीरों को संधान मिला है। मुझको अद्भुत ज्ञान मिला है।।

मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ – Why I blame someone

वो मिला नहीं तो भी क्या हुआ, मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ? जो नसीब में ही लिखा नहीँ, तो मैं क्या करूँ, तो मैं क्यूँ मरुँ? वो जुदा हुए, मेरी जिंदगी, न जुदा हुई, न ख़तम हुई, उन्हें फिर से पानें की ख्वाहिशें, मेरी चाहतें न दफ़न हुई, ये जो दिल है, उनका मुरीद है, मैं मना करूँ भी तो क्यूँ करूँ? वो मिला नहीं तो भी क्या हुआ, मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ?