बिन मेरे श्रृंगार कैसा – Break-up

कल तुम्हारा वन हरा था झूमतीं आयीं बहारें आ गया सावन सुहाना साथ ले रिमझिम फुहारें आज जब पतझड़ मिला है सत्य से प्रतिकार कैसा? माँग का सिंदूर हूँ मैं बिन मेरे श्रृंगार कैसा?