छलावा काहे का – चार मुक्तक

देख गिरी दीवार, धमाका मेरा है इस प्रदेश का सीएम, काका मेरा है जुबां हिलाने से पहले यह तय कर ले मेरी है सरकार, इलाका मेरा है

मेरे जज़्बात न पूछो – दो मुक्तक

अजब सी आग जलती है कि दिल की बात न पूछो, धुआँ आने लगा बाहर, मेरे हालात न पूछो, कहीँ ऐसा न हो की तुम झुलस जाओ करीब आकर, बस अपनी बात कह दो पर मेरे जज़्बात न पूछो।