इस तरह तुमने निहारा – गीत

रश्मि-रंजित धवल तन पर रेशमी परिधान तेरा ये मधुर मुस्कान तेरी फिर सुरीला गान तेरा लग रहा है दैव ने है स्वर्ग से तुमको उतारा। आज मन चंचल हुआ कुछ इस तरह तुमने निहारा।।

मुझपर अधिकार तुम्हारा – एक प्रेमगीत

तुम्हें याद है मंदिर में जब, हम पहली बार मिले थे तुमनें पलकें थीं झुकाई, अधरों पर फूल खिले थे बस एक झलक ने छेड़ी थी, मेरे दिल का इकतारा मेरे दिल का इकतारा

यही फ़लसफ़ा है, यही जिंदगानी – एक गीत – You need someone

कोई भी न जानें मुकद्दर में क्या है यहाँ आदमी इक खिलौना बना है नहीं मंजिलों की खबर है किसी को, ये राहें दिखाती हैं आँखे सभी को मगर फिर भी इंसान रुकता कहाँ है भले कल की बातें न उसको पता है कहीं भागते ही न बीते जवानी यही फ़लसफ़ा है, यही जिंदगानी

इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा – I’m Innocent

मुस्कान तुम्हारी कातिल है, नागिन जुल्फें लहरातीं हैं, बस एक झलक ही काफी है, सम्मोहित सी कर जाती है। यदि मैं आपा खो बैठूं फिर अंजाम तुम्हारे सर होगा, मुझको दीवाना करने का इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा।