घर ही में बीवियों से खुराफ़ात सीखिए – हास्य मुक्तक

घर ही में बीवियों से खुराफ़ात सीखिए, कैसे करेंगे बॉस को बर्दास्त, सीखिए, बढ़ता है लॉक डाउन जो तो बढ़ने दीजिए, कूकिंग व राजनीति एक साथ सीखिए

मेरे जज़्बात न पूछो – दो मुक्तक

अजब सी आग जलती है कि दिल की बात न पूछो, धुआँ आने लगा बाहर, मेरे हालात न पूछो, कहीँ ऐसा न हो की तुम झुलस जाओ करीब आकर, बस अपनी बात कह दो पर मेरे जज़्बात न पूछो।

यहाँ महफूज़ बैठे हो – दो मुक्तक

कोई बर्बाद होता है, यहाँ महफूज़ बैठे हो, चुराए नोट गिनने में इधर मशरूफ बैठे हो, लड़ाई रोटियों की है, गरीबी का ये आलम है, डिनर के बाद हाथों में लिए तुम जूस बैठे हो।

मैं तेरी जान हूँ, तुम मेरी जान हो – मुक्तक संग्रह

किस कदर हो गए तुम परेशान हो, कितनी मासूम हो, कितनी नादान हो, लोग पूछेंगे तो मैं बता दूंगा ये, मैं तेरी जान हूँ, तुम मेरी जान हो।

निगाहें क्यों चुराते हो – मुक्तक संग्रह

​जो तेरे पास आता हूँ, निगाहें क्यों चुराते हो, निगाहों को चुराकर के, मेरा दिल क्यों जलाते हो, मेरा दिल लूटकर अनजान बनने की तेरी आदत, तुम्हारे इश्क में मर जाऊँगा, क्यों आजमाते हो?

किनारा दिख रहा है – Let us help each other

कवि की आग कोई घर नहीं, शमां जलाती है। ​जो कोई ख्वाब हो सोया, कलम उसको जगाती है, कोई जब साँस लेता है, हवाएँ चलनें लगतीं हैं, मैं जब भी आह भरता हूँ, मजा दुनियां उठाती है।

शराफत दिल में रखता हूँ – मुक्तक 

बड़ी खामोशियों से मैं इबारत दिल में लिखता हूँ, तुम्हारा प्यार है मेरी इबादत, दिल में रखता हूँ, बहुत ही खूबसूरत हुस्न है तेरा मगर फिर भी, दीवाना सादगी का हूँ, शराफत दिल में रखता हूँ।

वही उठता है जिसकी रूह में औकात होती है-मुक्तक संग्रह

अमीरों की जहाँ पर सल्तनत बर्बाद होती है, गरीबों के लिए बेहद ख़ुशी की बात होती है, जभी यह जिंदगी झकझोरती, बुनियाद हिलती है, वही उठता है जिसकी रूह में औकात होती है।