पत्थर में भी फूलों सी नज़ाकत देखी

मैंने पत्थर में भी फूलों सी नज़ाकत देखी पिस के सीमेंट बने, ऐसी शराफ़त देखी थी तेज हवा, उनका आँचल गिरा गई इस शहर ने उस रोज क़यामत देखी

मुझसे इंतकाम न ले – ग़ज़ल

Poets Think Differently

जरा सा हाथ लगा, गिर पड़ा तेरा गमला बात छोटी सी है, तू मुझसे इंतकाम न ले इस गम-ए-हिज़्र को बनने दे तू मेरा कातिल, मुझपे मत तीर चला, सर पे ये इल्ज़ाम न ले

​दिलों में झाँकता, जमीर टटोलता कोई – See the heart’s beauty, not only face

दिलों में झाँकता, जमीर टटोलता कोई, 'बड़ा ही खूबसूरत है' ये बोलता कोई। जिसे भी देखिए चेहरे पे फ़िदा हो जाता, हुस्न की भीतरी परतें भी खोलता कोई।