माँ शारदे! वर दे – सरस्वती वंदना

माँ शारदे! वर दे

इस धरा पर जो तेरे बालक दुःखी या दीन हों, कर कृपा करुणामयी, कोई कहीँ ना हीन हो, हर तरफ बस प्रेम का माहौल, चहुँदिश भक्ति हो, कर्तव्य का हो बोध, सबमें चेतना की शक्ति हो। माँ शारदे! वर दे, हमारा धर्म में विश्वास हो, हर घड़ी, हर छड़ हमें निज-कर्म का आभास हो।

​जयति वीणावादिनी जय, जयति माँ ज्योतिर्मयी – सरस्वती वंदना

​जयति वीणावादिनी जय, जयति माँ ज्योतिर्मयी, मैं खड़ा करबद्ध होकर माँ, परम् ममतामयी। चक्षु खोलो, देख लो, क्या-क्या जगत में हो रहा, घन तिमिर में मुख छिपाकर, अब उजाला रो रहा, ज्ञान है, पर ज्ञान का उपयोग करता कौन है, जल रही है यह धरा, हर आदमी पर मौन है।