मैं हूँ माटी का दिया, मेरा भी कुछ अरमान है – The Wishes Of The Soil Lamp

खुश हुआ कुम्हार मुझको बेचकर बाजार में, पर मुझे डर है की शायद मैं बना बेकार में, कौन पूछेगा मुझे इस चमचमाते शहर में, हे विधाता! कर सकूँगा क्या तेरा सत्कार मैं? काश की मैं भी मना लूँ, कल दीवाली आ रही, ध्वनि पटाखों की मुझे बेचैन करती जा रही, शहर के लोगों सुनो, मेरा भी कुछ सम्मान है, मैं हूँ माटी का दिया, मेरा भी कुछ अरमान है।

मैं चमन का फूल हूँ – The Massage Of The Flower To The World

मैं चमन का फूल हूँ, कुचला गया तो क्या हुआ, हर तरफ फैली महक, मसला गया तो क्या हुआ। 'जिंदगी है जंग', मेरे रंग चढ़कर बोलती है, मेरी हर इक साँस सारे चमन में रस घोलती है, रौशनी हो या अँधेरा, मैं सदा खिलता रहा, ग्रीष्म, वर्षा, शीत का अनुभव मुझे मिलता रहा।

मैं तुम्हे अपनी सुनाना चाहता हूँ – I Hope You

जिंदगी का हर सबक, हर उलझनें गीतों में ढाला, चाह थी दुनियां में हो, इंशानियत का बोलबाला, गीत अपने, साथ तेरे गुनगुनाना चाहता हूँ। मैं तुम्हे अपनी सुनाना चाहता हूँ।

कभी आंधी, कभी बवंडर दिखाई देता है – A New Classification Of Poetry

We may classify the poetry as  1- Serious poetry 2- Semi serious poetry 3- Light poetry With above reference the first one is the outcome of the deep insight of the poet in any subject, incident or any thing else, on the other hand second type starts in light way, may be the imitation of an art. But some times it effects more strongly than serious one, specially when the expressed emotion be naturalized.

‘मौन हाहाकार- The Roar Of The Silence’

फिर सँवर जाए हमारी जिन्दगी गर तुम मिलो, फूल सा मैं भी खिलूँ फिर फूल सा तुम भी खिलो, फिर हृदय में कोंपलें हों, ना रहे प्रतिबन्ध कोई, गूंजता है मौन हाहाकार, ना अवलंब कोई।

हो सके तो याद कर लेना मुझे भी- Don’t Forget Me

Don't forget me

आज तक का साथ था तेरा हमारा, आज चमका भाग्य का तेरा सितारा, चाँद की ख्वाहिस सभी को रास आती, पर दिये की रोशनी पर हक़ हमारा, हो मुबारक चांदनी के पल तुझे भी, हो सके तो याद कर लेना मुझे भी।

‘आधार न जाने क्या होगा? How To Be Positive Towards Relations’

Being positive towards relations

है आशा में विश्वास बहुत, तेरे मिलने की आस बहुत, यदि नहीं जगह इस धरती पर, उड़ने को यह आकाश बहुत, दुनियाँ की बातें कौन करे, ये जलती है तो जलने दो, अपने अंदर भी प्रेम भावना, पलती है तो पलने दो, तुम मिले अगर मेरे दिल का, उद्गार न जाने क्या होगा? इस दुनिया की निष्ठुरता का, आधार न जाने क्या होगा?