कविताएँ लिखता जाता हूँ – Poets Are Prophets

जब-जब अंतर अकुलाता है भावों की धार बहाता है मैं निज छंदों से सींच-सींच स्वप्नों की फसल उगाता हूँ। कविताएँ लिखता जाता हूँ।।

विचार के धनी मनुष्य – The World Loves Creation

न पूछ रात-रात भर यूँ जाग करके क्या मिला किसी को रौशनी मिली किसी को हौसला मिला जो सींच भाव की जमीन स्वप्न बीज बो गया ऊगा के प्रेरणा का पेड़ अंतरिक्ष हो गया जो छोड़ कर अमिट निशान व्योम में सिधारता। विचार के धनी मनुष्य को जहाँ दुलारता।।

इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा – I’m Innocent

मुस्कान तुम्हारी कातिल है, नागिन जुल्फें लहरातीं हैं, बस एक झलक ही काफी है, सम्मोहित सी कर जाती है। यदि मैं आपा खो बैठूं फिर अंजाम तुम्हारे सर होगा, मुझको दीवाना करने का इल्ज़ाम तुम्हारे सर होगा।

बाज़ार में अश्कों की कीमत तो देखिए – कलाम-ए-शायर

​है मुफ़लिसी का दौर पर हिम्मत तो देखिए, इस शायर-ए-फनकार की मोहब्बत तो देखिए। बिन पंख के ही उड़ने को बेताब किस कदर, नादान परिंदे की हसरत तो देखिए।

अपने ठिकाने आ गए – ‘कलाम-ए-शायर’ – The experience speaks

खुद के जख्मों की नहीं परवाह, हम भी सिरफिरे, दुसरे के घाव पर मरहम लगाने आ गए। इस कदर मशगूल थे, यह जिंदगानी का सफ़र, कुछ पता ही ना चला, अपने ठिकाने आ गए।

खंडहर, भुतहा मकानों में परिंदे छुप गए – ग़ज़ल

खुद तुम्हारे पाँव कीचड़ में सने हैं दरअसल, दूसरों को कायदे-कानून समझाने गए?? एक मुट्ठी फायदे खातिर वहां कश्मीर में, मुल्क में तुम नफरतों की आग भड़कानें गए??

बस करो, इंसानियत की हद हुई – अति सर्वत्र वर्जयेत्

दर्दे-दिल बर्दाश्त की तो हद हुई, चुप रहूँ कैसे मैं अब तो हद हुई। तेरी ज़ानिब और कोई देखता, और मैं हूँ शांत ये तो हद हुई। जेब में सिक्का न हो, मैं दावते दूँ? बस करो, इंसानियत की हद हुई।

मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ – Why I blame someone

वो मिला नहीं तो भी क्या हुआ, मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ? जो नसीब में ही लिखा नहीँ, तो मैं क्या करूँ, तो मैं क्यूँ मरुँ? वो जुदा हुए, मेरी जिंदगी, न जुदा हुई, न ख़तम हुई, उन्हें फिर से पानें की ख्वाहिशें, मेरी चाहतें न दफ़न हुई, ये जो दिल है, उनका मुरीद है, मैं मना करूँ भी तो क्यूँ करूँ? वो मिला नहीं तो भी क्या हुआ, मैं गिला करूँ भी तो क्यूँ करूँ?