​तेरा चेहरा तस्वीर बना, प्रतिबिम्बित मेरी आँखों में – You’re My Poetry

अतएव जिरह पर लोगों के मैं अक्सर ऐसा कहता हूँ, 'मां सरस्वती का साधक हूँ, उनकी ही सेवा करता हूँ, उस महामयी की महिमा के प्रतिफल हैं सारे गीत मेरे, वो मधुर चेतना भरतीं हैं, इन गीतों में संगीत मेरे।' पर हुए मंजुरित, फल आए, तुमसे ही मेरे साखों में, तेरा चेहरा तस्वीर बना प्रतिबिम्बित मेरी आँखों में।

‘मौन हाहाकार- The Roar Of The Silence’

फिर सँवर जाए हमारी जिन्दगी गर तुम मिलो, फूल सा मैं भी खिलूँ फिर फूल सा तुम भी खिलो, फिर हृदय में कोंपलें हों, ना रहे प्रतिबन्ध कोई, गूंजता है मौन हाहाकार, ना अवलंब कोई।