दोस्ती – Friendship

​जो है लेकिन नहीं के बराबर है तो जो नहीं है उसे ढूंढना ही पड़ता है, और कहते हैं ढूंढने से भगवान भी मिल जाता है, सच्चा दोस्त तो फिर भी इंसान है। लेकिन शर्त यह है की सच्चाई अपने भीतर भी हो। दोस्ती भी सिक्के की तरह है जिसमे चित और पट दोनों का होना आवश्यक है नहीं तो यह सिक्का खोटा कहलाता है।