‘मौन हाहाकार- The Roar Of The Silence’

फिर सँवर जाए हमारी जिन्दगी गर तुम मिलो, फूल सा मैं भी खिलूँ फिर फूल सा तुम भी खिलो, फिर हृदय में कोंपलें हों, ना रहे प्रतिबन्ध कोई, गूंजता है मौन हाहाकार, ना अवलंब कोई।

‘जब मैंने साथी को पाया – Man Is The Puppet In The Hands Of Destiny’

You Can't Change The Destiny

जब मैंने साथी को पाया। दिल में मेरे उल्लास उठी, नस नस में उग्र प्रवाह उठी, मन मंदिर में जिसने आकर कर दी थी शीतल छाया, जब मैंने साथी को पाया। जब सबने मुझको छोड़ दिया, जब सबने नाता तोड़ दिया, वे थे विपत्ति के दिन मेरे जब भाग्य मुझे उस तक लाया, जब मैंने … Continue reading ‘जब मैंने साथी को पाया – Man Is The Puppet In The Hands Of Destiny’